रविवार, 6 मार्च 2016

गनेस बहू



गनेस बहू
घूंघट में
और पीछे सरक गई है गनेस बहू

पता नहीं कब
कैसी खबर जाय
यहीं तो कहा था पति ने
जाते हुए

क्या भरोसा
गाजर की खेती
और दूर देश की नौकरी का

उधार खाते
लाज का कलेजा काठ हो गया है

उसके भीतर
ऑधियॉ चल रही है
मान चुकी कितनी मनौतियां
बस कुसल से हो पति

मुआ डाकिया
दरवाजे पर बैठा
कहता क्यों नहीं कुछ भी
जल्दी...

हाय राम!
इससे बड़ी खुशी और क्या होगी
कि दूर देस में कुसल है पति

पति ने
रूपये भेजे हैं खर्च के
बच्चों को दुआएं और उसे...प्यार...
हाय राम
शरम भी आई उसे
इस उम्र में डाक से भेजते प्यार
सरेआम...

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